भारत: भारत के राजनीतिक इतिहास में 9 जून 2026 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजाद भारत में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बने रहने के पंडित जवाहरलाल नेहरू के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है। वह देश के संसदीय इतिहास में सबसे लंबे कार्यकाल तक जनता द्वारा चुने गए प्रधानमंत्री रहने वाले शीर्ष नेता बन गए हैं। 9 जून 2024 को उन्होंने तीसरी बार एनडीए (NDA) सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ली थी, और अब सत्ता के शीर्ष पर उनके लगातार 12 साल भी पूरे हो गए हैं। पीएम मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार देश के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी और आज 9 जून 2026 तक उनके कार्यकाल के अभूतपूर्व 4398 दिन पूरे हो चुके हैं, जो देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया रिकॉर्ड है।
इस महान रिकॉर्ड को अपने नाम करने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति की दिशा और दशा दोनों को बदल कर रख दिया है। अब तक इस पद पर सबसे लंबे समय तक निर्वाचित होकर देश की सेवा करने का गौरव प्रथम प्रधानमंत्री के नाम था, लेकिन समय के चक्र ने अब नरेंद्र मोदी को इस सूची में सबसे ऊपर लाकर खड़ा कर दिया है। इस बड़ी उपलब्धि के बाद देश भर के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल दिनों की संख्या नहीं, बल्कि देश की जनता का उनके प्रति अटूट विश्वास और उनके नेतृत्व की निरंतरता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
10 जून को दिल्ली में एनडीए का महामंथन, चंद्रबाबू नायडू पेश करेंगे बड़ी उपलब्धियों का प्रस्ताव
इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को पार करने के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) अपनी पूरी ताकत और एकजुटता का प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार है। राजधानी दिल्ली में 10 जून को एनडीए शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों और शीर्ष नेताओं की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाई गई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश के विकास में एनडीए की एकजुटता को दिखाना और आने वाले समय के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार करना है।
बैठक के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू मंच से एक विशेष सराहना और बधाई का प्रस्ताव रखेंगे। गठबंधन के अन्य सभी सहयोगी दलों के दिग्गज नेता इस ऐतिहासिक प्रस्ताव का पूरी गर्मजोशी के साथ समर्थन करेंगे। इस प्रस्ताव में मुख्य रूप से बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल की उन बड़ी आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक उपलब्धियों का विशेष रूप से उल्लेख किया जाएगा, जिन्होंने भारत को वैश्विक पटल पर एक नई महाशक्ति के रूप में स्थापित किया है।

जानिए क्या था पंडित नेहरू का 12 साल का वो रिकॉर्ड, जो 2026 में आकर आखिरकार टूट गया
इस पूरे रिकॉर्ड के गणित को समझने के लिए हमें इतिहास के पन्नों को पलटना होगा। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 13 मई 1952 को देश में हुए पहले आम चुनाव के बाद पहली बार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। नेहरू जी इसके बाद लगातार 4397 दिन यानी 12 साल और 14 दिन तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के पद पर बने रहे थे। 9 जून को पीएम मोदी ने उनके इसी 4397 दिनों के रिकॉर्ड को पार करते हुए 4398 दिन यानी 12 साल और 15 दिन का नया कार्यकाल पूरा कर लिया।
हालांकि, इतिहासकार यह भी बताते हैं कि पंडित नेहरू कुल मिलाकर 15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 तक देश के प्रधानमंत्री रहे थे, जिससे उनका कुल कार्यकाल 6130 दिनों का होता है। लेकिन इसमें से शुरुआती करीब 5 साल वह देश की अंतरिम सरकार के प्रमुख के तौर पर प्रधानमंत्री थे, यानी उस दौरान वह जनता द्वारा सीधे लोकसभा चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री नहीं बने थे। यही वजह है कि जब बात ‘निर्वाचित’ (Elected) प्रधानमंत्री के रूप में लगातार सबसे लंबे समय तक पद पर रहने की आती है, तो नरेंद्र मोदी अब इतिहास में सबसे आगे निकल चुके हैं। इससे पहले उन्होंने 25 जुलाई 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लगातार 4077 दिनों के कार्यकाल का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया था।

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का सफर: सिक्किम के चामलिंग का रिकॉर्ड तोड़ बने सत्ता के ‘अजेय योद्धा’
नरेंद्र मोदी के नाम केवल देश के स्तर पर ही नहीं, बल्कि समग्र शासनकाल के मामले में भी एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है जिसे तोड़ पाना किसी भी राजनेता के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। मार्च 2026 में ही उन्होंने भारतीय राजनीति का एक विराट इतिहास अपने नाम किया था। अगर उनके गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दिनों और देश के प्रधानमंत्री रहने के दोनों कार्यकालों को एक साथ जोड़ दिया जाए, तो वह 8931 दिनों से भी अधिक समय तक लगातार सत्ता के शीर्ष पर रहने वाले भारत के पहले राजनेता बन चुके हैं।
इस मामले में उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के रिकॉर्ड को ध्वस्त किया था, जो कुल 8930 दिनों तक सत्ता के शीर्ष पद पर आसीन रहे थे। मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात का कायाकल्प करने से लेकर देश के प्रधानमंत्री के रूप में ‘सशक्त भारत’ के निर्माण तक का यह सफर यह दिखाता है कि प्रशासनिक कार्यकुशलता और जनकल्याणकारी योजनाओं के दम पर कैसे कोई नेता जन-जन के दिलों में अपनी जगह सुरक्षित रख सकता है।

आजादी के बाद जन्मे देश के पहले पीएम, सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले गैर-कांग्रेसी नेता
पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद नरेंद्र मोदी देश के दूसरे ऐसे एकमात्र प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) में अपनी पार्टी और गठबंधन को प्रचंड जीत दिलाकर लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही उनके नाम कई और भी अनोखे रिकॉर्ड दर्ज हैं। वह भारत के इतिहास के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनका जन्म देश की आजादी मिलने के बाद (17 सितंबर 1950) हुआ है। उनसे पहले के जितने भी प्रधानमंत्री हुए, उन सभी का जन्म 1947 से पहले हुआ था।

इसके अतिरिक्त, पीएम मोदी भारत के पूरे राजनैतिक इतिहास में सबसे लंबे समय तक देश की सत्ता संभालने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी बन चुके हैं। वह गैर-कांग्रेसी सरकार के ऐसे पहले जननेता हैं, जिन्होंने न केवल लगातार दो बार पूर्ण बहुमत की सरकार चलाई, बल्कि गठबंधन के दौर में भी अपनी मजबूत साख के साथ अब तीसरी बार एनडीए सरकार का पूरी मजबूती और स्थिरता के साथ नेतृत्व कर रहे हैं। उनके इस लंबे कार्यकाल ने यह साबित कर दिया है कि राष्ट्रहित और अंत्योदय की नीतियों के बल पर देश में स्थिरता का एक नया युग लाया जा सकता है।




