लखनऊ (राजधानी न्यूज):
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के सियासी भंवर में उतरने से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने सांगठनिक ढांचे को अभेद्य और पारंगत बनाने में जुट गई है. जिस ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ के मंत्र के दम पर भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रचंड विजय दर्ज की थी और उत्तर प्रदेश में लगातार दो बार पूर्ण बहुमत की सत्ता हासिल की, पार्टी अब उसी पुराने और अचूक मंत्र को नए कलेवर में दोहराने जा रही है.
22 जुलाई को मथा जाएगा चुनावी रणनीति का अमृत
‘मिशन-2027’ को धार देने के लिए भाजपा ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है. पार्टी आगामी 22 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर एक साथ, एक ही दिन ‘बूथ सम्मेलन’ का आयोजन करने जा रही है. इस सम्मेलन में पार्टी जमीनी स्तर पर चुनावी रणनीति और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों को मथेगी.
- तारीख में बदलाव: इससे पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की मौजूदगी में 11 जुलाई को हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस सम्मेलन की तारीख 19 जुलाई तय की गई थी, जिसे रणनीतिक कारणों से आगे बढ़ाकर अब 22 जुलाई कर दिया गया है.
- बूथ अध्यक्षों को विशेष सम्मान और संदेश: सम्मेलन के दौरान ज़मीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह देने के लिए एक बड़ा संदेश दिया जाएगा. कार्यक्रम में हर बूथ अध्यक्ष की कुर्सी के ऊपर उनका नाम और उनकी बूथ संख्या मोटे व बड़े अक्षरों में लिखकर लगाई जाएगी.
संगठन ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी: तीन दिग्गजों के हाथ कमान
विधानसभा स्तर पर होने वाले इन महा-सम्मेलनों को सुचारू और प्रभावी ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रदेश नेतृत्व ने प्रमुख पदाधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं:
- प्रदेश संयोजक: भाजपा प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल को इस पूरे अभियान का मुख्य प्रदेश संयोजक नियुक्त किया गया है.
- प्रदेश सह-संयोजक: प्रदेश मंत्री शिव भूषण सिंह और राहुल वाल्मीकि को सह-संयोजक की कमान सौंपी गई है.
- क्षेत्रीय और जिला स्तर पर त्रिमूर्ति: इसी तर्ज पर क्षेत्रीय और जिला स्तर पर भी महामंत्री या उपाध्यक्ष स्तर के पदाधिकारियों में से एक संयोजक और दो सह-संयोजक बनाए जाएंगे, जो सीधे प्रदेश टीम के संपर्क में रहेंगे.
रणनीति के 6 बिंदु और सांगठनिक समन्वय की रूपरेखा
पार्टी ने प्रदेश, क्षेत्र और जिला स्तरीय पदाधिकारियों को पत्र भेजकर छह मुख्य बिंदुओं पर मुस्तैदी से तैयारी करने के निर्देश दिए हैं:
- अतिथियों का चयन: प्रदेश की केंद्रीय टीम हर क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष से विचार-विमर्श करके सम्मेलनों के लिए मुख्य अतिथियों (विशिष्ट नेताओं) के नाम फाइनल करेगी.
- स्थानीय समन्वय: विधानसभा स्तर पर एक विशेष कार्यक्रम संयोजक नियुक्त होगा, जो वर्तमान विधायक या वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी रहे नेता से सीधा संवाद कर पूरी रणनीति तैयार करेगा.
- वित्तीय व प्रशासनिक व्यवस्था: सम्मेलन की पूरी व्यवस्था और प्रबंधन की जिम्मेदारी वर्तमान विधायक, पिछले चुनाव के प्रत्याशी और जिलाध्यक्ष द्वारा नामित जनप्रतिनिधि संयुक्त रूप से संभालेंगे.
विपक्ष की काट और नए जिलाध्यक्षों की ‘अग्निपरीक्षा’
इस महा-अभियान के जरिए भाजपा केवल कार्यकर्ताओं को रिचार्ज ही नहीं कर रही, बल्कि भीतरखाने एक बड़ा सर्वे और फीडबैक भी जुटा रही है:
- कमजोर और मजबूत सीटों का इनपुट: भाजपा यूपी में पहले ही तीन चक्रों का व्यापक सर्वे पूरा कर चुकी है. अब इन बूथ सम्मेलनों के जरिए धरातल पर पार्टी की कमजोरी, स्थानीय नेताओं की जनता में छवि और विपक्षी दलों की रणनीतियों की वास्तविक जानकारी जुटाई जाएगी.
- नए कप्तानों की परीक्षा: हाल ही में नियुक्त किए गए नए जिलाध्यक्षों के लिए यह आयोजन एक बड़ी परीक्षा की तरह होगा, क्योंकि आने वाले दिनों में उन्हें ऐसे कई बड़े सम्मेलनों का प्रबंधन और नेतृत्व संभालना है.
- सीधे दिल्ली जाएगी रिपोर्ट: इस पूरे महा-सम्मेलन की मुकम्मल और विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट तैयार कर भाजपा की राष्ट्रीय इकाई (केंद्रीय नेतृत्व) को भेजी जाएगी.
‘The Lucknow 360’ भाजपा के इस बूथ-स्तरीय महा-अभियान को 2027 के चुनावी रण की तैयारियों में विपक्ष पर एक बड़ी शुरुआती मनोवैज्ञानिक और सांगठनिक बढ़त के रूप में देखता है.




