लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सीतापुर रोड पर चल रहे भव्य नौ दिवसीय श्रीराम कथा महाकुंभ के समापन अवसर पर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिरकत की। मंगलवार को कथा के आखिरी दिन व्यासपीठ का आशीर्वाद लेने पहुंचे सीएम योगी ने अपने संबोधन में समसामयिक मुद्दों को त्रेतायुग के प्रसंगों से जोड़कर एक बेहद बड़ा और कड़ा संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने रावण की सेना के राक्षसों की तुलना आज के दौर की नकारात्मक ताकतों से करते हुए कहा कि खर-दूषण, मारीच और सुबाहु जैसे राक्षस असल में रावण के इशारे पर ‘लैंड जिहाद’ का अभियान चला रहे थे। ये आसुरी शक्तियां संतों को उनके आश्रमों से बेदखल कर जमीनों पर अवैध कब्जे करती थीं और पूरे दंडकारण्य में उजाड़ मचाती थीं।
मुख्यमंत्री ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन को आज के दौर की सबसे बड़ी समस्याओं के समाधान के रूप में पेश किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रभु श्रीराम ने हमेशा नारी की गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए काम किया, जो आज के समय में ‘लव जिहाद’ जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए सबसे बड़ा और आदर्श उदाहरण है। उन्होंने देश के नागरिकों को राष्ट्रवाद के सूत्र में पिरोते हुए कहा कि शायद ही कोई ऐसा भारतीय होगा, जिसके डीएनए में भारत माता का अंश हो और वह भगवान श्रीराम के अस्तित्व या उनकी महिमा को न मानता हो। सीएम योगी के इस आक्रामक और स्पष्ट रुख के बाद पूरा पंडाल ‘जय श्री राम’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।
व्यासपीठ पर हुआ गुप्त संवाद, जगद्गुरु ने पोटली से निकालकर मुख्यमंत्री को दी खास भेंट
कथा के नौवें और अंतिम दिन का नजारा बेहद अलौकिक और ऐतिहासिक था। जैसे ही सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ मंच पर पहुंचे, उन्होंने सबसे पहले जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज के चरणों में शीश नवाया। इसके बाद सीएम योगी ने आदरपूर्वक जगद्गुरु को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान मंच पर एक बेहद भावुक और कौतूहल पैदा करने वाला क्षण भी देखने को मिला। शॉल ओढ़ाने के बाद जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज करीब एक मिनट तक मुख्यमंत्री के कान में बेहद गोपनीय अंदाज में कुछ कहते नजर आए। दोनों के बीच इस गुप्त मंत्रणा को पंडाल में बैठे श्रद्धालु बड़े कौतूहल से देखते रहे।
कान में अपनी बात पूरी करने के बाद जगद्गुरु ने अपनी विशेष पोटली से निकालकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक गुप्त भेंट सौंपी। इस दिव्य उपहार को पाकर मुख्यमंत्री के चेहरे पर एक अलग ही संतोष और प्रसन्नता की लहर दौड़ गई। उन्होंने इस भेंट को सादर स्वीकार कर माथे से लगाया। इसके बाद मीडिया प्रभारी डॉ. एस.के. गोपाल ने बताया कि नौ दिनों से चल रहे इस आध्यात्मिक अनुष्ठान का समापन मंगलवार दोपहर को एक विशाल भंडारे के साथ हो रहा है, जिसमें हजारों भक्तों को प्रभु का महाप्रसाद वितरित किया जा रहा है।

‘आस्था नहीं तो यह धरती धर्मशाला नहीं’, भारत विरोधियों को मुख्यमंत्री की दो टूक चेतावनी
कथा मंडप में मौजूद जनसैलाब को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्र सुरक्षा और सांस्कृतिक निष्ठा पर अपनी बात बेहद कड़े लहजे में रखी। उन्होंने देश विरोधी और संस्कारों का मखौल उड़ाने वाले तत्वों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग भारत भूमि के प्रति अपनी निष्ठा नहीं रखते, जिनकी इस देश के संस्कारों और सनातन मूल्यों में कोई आस्था नहीं है, उनके लिए भारत की पावन धरती कोई ‘धर्मशाला’ नहीं हो सकती कि जब मन चाहे आए और जब मन चाहे उजाड़ कर चले गए। हमें इस कड़े संकल्प के साथ अपनी राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना होगा।
सीएम योगी ने समाज को बांटने वाली ताकतों से भी सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज भी कुछ लोग कभी जाति के नाम पर तो कभी मजहब के नाम पर समाज को छिन्न-भिन्न करने का कुत्सित प्रयास करेंगे, लेकिन हमें कथा के उस असली मर्म को समझना होगा जिसे व्यासपीठ से जगद्गुरु ने समझाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि अगर हम शिव और राम के उपासक हैं, तो हमें केवल उनकी पूजा नहीं करनी है, बल्कि समाज के हर वर्ग को गले लगाकर उनके आदर्शों के अनुसार अपना जीवन जीना होगा।
जिनकी भारत के प्रति आस्था नहीं है,
उन लोगों के लिए भारत की धरती ‘धर्मशाला’ नहीं हो सकती है… pic.twitter.com/wl5aEuRYq7
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 9, 2026
राम का द्रोह करने वालों का वजूद मिटा, हनुमान चालीसा में है हर संकट का अचूक हल
मुख्यमंत्री ने इतिहास और पुराणों का संदर्भ देते हुए समझाया कि नकारात्मक शक्तियां हर कालखंड में समाज को डराने के लिए सामने आएंगी, लेकिन सज्जन शक्ति को उनका डटकर मुकाबला करना होगा। प्रभु राम जब पहली बार महर्षि विश्वामित्र के साथ घर से निकले थे, तो उन्हें सबसे पहले ताड़का मिली थी जो रावण के विचारों से प्रेरित थी। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि ‘गलत लोगों को हमेशा गलत का ही साथ मिलता है’। रावण और मारीच जैसे लोग बहुत उच्च कुल और श्रेष्ठ व्यवस्था में पैदा हुए थे, लेकिन राम से द्रोह (दुश्मनी) करने के कारण वे पशुओं की मौत मारे गए।
इसके विपरीत, उन्होंने पवनसुत हनुमान जी और विभीषण का उदाहरण देते हुए कहा कि जन्म के समय इन्हें भले ही सामान्य जीवन मिला था, लेकिन राम की संगति का ऐसा असर हुआ कि आज वे पूरे विश्व के लिए पूजनीय बन गए। उन्होंने याद दिलाया कि सनातन परंपरा में सुबह जिन सात परम पूजनीय नामों का स्मरण किया जाता है, उनमें विभीषण का भी नाम शामिल है। सीएम ने आम जनमानस को भरोसा देते हुए कहा कि हमारे जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी परेशानी क्यों न हो, हमारे यहां हर समस्या का एकमात्र और अचूक समाधान ‘हनुमान चालीसा’ के पाठ में समाहित है।
ये ‘चाचा’ और ‘मामा’ जब किसी व्यवस्था में पड़ते हैं,
तो हमेशा उसको कुसंग की तरफ ही लेकर जाते हैं… pic.twitter.com/NLHd8W8Xyl
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 9, 2026
जो काम मध्यकाल में गोस्वामी तुलसीदास ने किया, वही अलख आज जगद्गुरु रामभद्राचार्य जगा रहे
अपने संबोधन के आखिरी हिस्से में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने जगद्गुरु की तुलना मध्यकाल के महान संत गोस्वामी तुलसीदास से करते हुए कहा कि जब देश विदेशी आक्रांतों के अत्याचार से जूझ रहा था, तब तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के जरिए जनचेतना जागृत की थी और पूरे उत्तर भारत को भक्ति के एक सूत्र में पिरोया था। ठीक वही ऐतिहासिक काम आज के इस कठिन दौर में जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज कर रहे हैं। वे कोई आम संन्यासी नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना के प्रहरी हैं।
जिसने भी प्रभु श्री राम को अपने जीवन का आदर्श बनाया, उसका कल्याण हुआ है… pic.twitter.com/eThScB4SDw
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 9, 2026
सीएम ने महाराज श्री के सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में देश के पहले दिव्यांग विश्वविद्यालय की स्थापना की और आज भी उसके कुलाधिपति के रूप में सेवा दे रहे हैं। आंखों से न देख पाने के बावजूद वे सिर्फ भक्तों का मान रखने और समाज को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आचरण से जोड़ने के लिए लगातार रामकथा सुना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि रामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए संतों ने 491 वर्षों तक लंबा संघर्ष और आंदोलन किया, क्योंकि वे जानते थे कि राम का एक नाम ही उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक पूरे भारतवर्ष को एक धागे में पिरो सकता है।




