नई दिल्ली/लखनऊ (राजधानी न्यूज डेस्क): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रविवार को हैदराबाद में देशवासियों से किए गए ‘सात संकल्पों’ के आह्वान ने देश की सियासत में उबाल ला दिया है। सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत समूचे विपक्ष ने प्रधानमंत्री की इन अपीलों को सरकार की आर्थिक और कूटनीतिक विफलता करार दिया। राहुल गांधी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अब देश चलाना प्रधानमंत्री के बस की बात नहीं रह गई है।
राहुल गांधी का पलटवार: “जनता को क्या खरीदना है, यह भी पीएम बताएंगे?”
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी की अपीलों को उनकी सरकार की विफलताओं का रिपोर्ट कार्ड बताया।
- विफलता का प्रमाण: राहुल ने लिखा, “कल मोदी जी ने जनता से त्याग मांगा। सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम इस्तेमाल करो, वर्क फ्रॉम होम करो। ये उपदेश नहीं हैं, ये विफलता हैं।”
- 12 साल का हिसाब: उन्होंने आगे कहा कि 12 साल सत्ता में रहने के बाद देश को इस मुकाम पर ला दिया गया है कि अब सरकार जनता को यह बता रही है कि उन्हें क्या खाना चाहिए और कहां जाना चाहिए। राहुल के अनुसार, यह प्रधानमंत्री की देश को संभालने में अक्षमता का स्पष्ट संकेत है।
मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे – सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
ये उपदेश नहीं – ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है – क्या ख़रीदे, क्या न…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 11, 2026
अखिलेश और संजय सिंह का तंज: “चुनाव खत्म, तो संकट शुरू”
विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी इस मामले में सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी:
- अखिलेश यादव (सपा प्रमुख): उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अर्थव्यवस्था और विदेश नीति दोनों मोर्चों पर फेल रही है। जैसे ही राज्यों के चुनाव खत्म हुए, सरकार को अचानक ‘वैश्विक संकट’ की याद आ गई। देश के लिए असली संकट केवल भाजपा है।<
चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया!
दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है : ‘भाजपा’
इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का… pic.twitter.com/2f8utdxbLR
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 11, 2026
- संजय सिंह (AAP नेता): उन्होंने तीखा सवाल किया कि क्या यह ‘त्याग’ चुनाव के दौरान याद नहीं था? उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक वोट चाहिए थे, तब तक सरकार ने बोझ उठाया, और अब जनता को खुद का बोझ उठाने के लिए कहा जा रहा है।
प्यारे देश वासियों चुनाव तक मोदी जी ने आपका बोझ उठाया, चुनाव ख़त्म आपका इस्तेमाल ख़त्म।
अब देशभक्ति के नाम पर लाइन में लग जाओ।
गैस महँगी हो गई अब पेट्रोल डीज़ल भी मँहगा होगा।
आप देश भक्ति के नाम पर पेट्रोल डीज़ल गैस का इस्तेमाल न करो, सोना न ख़रीदो, खाने के तेल का भी इस्तेमाल न… pic.twitter.com/ldJ3qREOz8— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) May 11, 2026
संकट की गहराई: 22 लाख करोड़ का आयात गणित
विपक्ष के हमलों के बीच आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि प्रधानमंत्री की चिंता के पीछे 22 लाख करोड़ रुपये का विशाल आयात बिल (Import Bill) है।
- सोना (6.40 लाख करोड़): भारतीयों द्वारा सोने की भारी मांग के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर बड़ा दबाव है।
- कच्चा तेल (10-17 लाख करोड़): युद्ध के कारण तेल 50% महंगा हो गया है, जिससे तेल आयात का खर्च 17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
- फर्टिलाइजर (1.50 लाख करोड़): कतर और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण उर्वरकों के दाम 76% तक बढ़ गए हैं।
- विदेश यात्रा (3.65 लाख करोड़): भारतीयों द्वारा विदेशों में खर्च की जाने वाली राशि में लगातार इजाफा हो रहा है।
विपक्ष के सवाल: “त्याग केवल आम आदमी ही क्यों करे?”
तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या देश एक बार फिर भुगतान संतुलन (Balance of Payments) के संकट की ओर बढ़ रहा है? उन्होंने कहा कि जब मंत्री और अधिकारी वायुसेना के विमानों और बड़े काफिलों में घूम रहे हैं, तो केवल आम नागरिक से ही त्याग की उम्मीद क्यों की जा रही है?
The Lucknow 360: विश्लेषण
प्रधानमंत्री की अपील और उस पर विपक्ष का पलटवार यह साफ करता है कि देश की आर्थिक स्थिति ‘युद्ध’ और ‘सप्लाई चेन’ के कारण नाजुक दौर में है। जहां सरकार इसे ‘राष्ट्रहित’ में किया गया आह्वान बता रही है, वहीं विपक्ष इसे ‘महंगाई’ और ‘कुप्रबंधन’ को छिपाने का तरीका मान रहा है। 22 लाख करोड़ का यह आयात बोझ भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनने वाला है।




