नई दिल्ली। देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली, धोखाधड़ी और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। भारी हंगामे और करीब 9 घंटे की विस्तृत चर्चा के बाद लोकसभा ने ध्वनि मत (Voice Vote) से ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ [Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026] को पारित कर दिया है।
वर्ष 2024 में बने मूल कानून को और अधिक सख्त, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से यह नया संशोधन लाया गया है। इसके तहत पेपर लीक गिरोहों और धांधली करने वाली एजेंसियों के लिए सजा व जुर्माने की राशि कई गुना बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही, राज्यसभा में ‘वंदे मातरम्’ के अनादर को दंडनीय अपराध बनाने वाला संशोधित विधेयक भी पास कर दिया गया है।
2024 के मूल कानून में हुए 4 सबसे बड़े ऐतिहासिक बदलाव
केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए संशोधन बिल में 2024 के कानून की तुलना में निम्नलिखित कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं:
1. व्यक्तिगत नक़ल और अनुचित साधनों पर सख्त सजा
- 2024 का नियम: 3 से 5 साल की जेल और अधिकतम ₹10 लाख तक का जुर्माना।
- 2026 का नया संशोधन: जेल की अवधि बढ़ाकर 5 से 10 साल तक करने और जुर्माना बढ़ाकर अधिकतम ₹50 लाख करने का प्रावधान है।
2. परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों पर ₹5 करोड़ का पेनल्टी
- 2026 का नया संशोधन: यदि कोई परीक्षा सेवा प्रदाता (Exam Conducting Agency) धांधली, पेपर लीक या लापरवाही में दोषी पाया जाता है, तो उस पर ₹5 करोड़ तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही, एजेंसी के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ व्यक्तिगत आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
3. संगठित पेपर लीक गिरोहों (माफिया) पर कसता शिकंजा
- 2024 का नियम: कम से कम 5 साल की जेल और न्यूनतम ₹1 करोड़ जुर्माना।
- 2026 का नया संशोधन: संगठित तरीके से गिरोह चलाकर पेपर लीक कराने वालों के लिए कम से कम 7 साल से लेकर 10 साल तक की जेल और न्यूनतम ₹10 करोड़ तक का भारी अर्थदंड (Fine) तय किया गया है।
4. जांच के लिए STF, विशेष अदालतें और 2 महीने की डेडलाइन
- स्पेशल टास्क फोर्स (STF): ऐसे अपराधों की त्वरित जांच के लिए समर्पित एसटीएफ के गठन का प्रावधान है।
- 2 महीने में जांच पूरी: मामले की विवेचना को लटकाने के बजाय 2 महीने के भीतर जांच पूरी करना अनिवार्य होगा।
- फास्ट ट्रैक कोर्ट और स्पेशल प्रॉसिक्यूटर: मुकदमों के जल्द निपटारे के लिए विशेष फ़ास्ट ट्रैक अदालतें बनेंगी और सरकार विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) नियुक्त करेगी।
- हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच में अपील: फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ 30 दिनों के भीतर हाईकोर्ट की 2 जजों की बेंच में ही अपील दायर की जा सकेगी, जिसका निपटारा अपील स्वीकार होने के 3 महीने के भीतर करना होगा।
नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में बनी ‘हाई पावर्ड टास्क फोर्स’
परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक को समाहित करने और भविष्य में फुल-प्रूफ पारदर्शी व्यवस्था बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और बड़ी घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि देश के जाने-माने टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक हाई पावर्ड टास्क फोर्स (High-Powered Task Force) का गठन किया गया है।
पीएम मोदी का बयान: “जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, वे जेलों में सड़ रहे हैं। लेकिन हमें भविष्य के लिए सोचना है। हमारी परीक्षा पद्धति भरोसेमंद, पारदर्शी और अत्याधुनिक तकनीक से लैस हो, इसलिए नंदन नीलेकणी जी की अगुवाई में टास्क फोर्स बनाई गई है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर दूरगामी कदम उठाए जाएंगे।”
संसद में तीखी बहस: विपक्ष का हंगामा और केंद्रीय मंत्री का पलटवार
बिल पर चर्चा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्ष के रुख पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने तीखा हमला बोला। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विपक्ष देश के लाखों युवाओं के इस गंभीर मुद्दे पर केवल राजनीति कर रहा है।
राहुल गांधी के बयानों का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक व्यवस्था में गोली चलाने या कार्रवाई का आदेश केंद्रीय गृह मंत्री नहीं, बल्कि मौके पर मौजूद मजिस्ट्रेट, डीएम या एसडीएम देते हैं। उन्होंने कहा कि बिना तथ्यों के सदन में बयानबाजी करना और भ्रम फैलाना उचित नहीं है। सरकार का साफ मानना है कि यह सख्त कानून देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखेगा और संगठित नकल माफिया की रीढ़ तोड़ देगा।




