लखनऊ (राजधानी न्यूज): लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात एक कांस्टेबल के वीडियो ने महकमे में खलबली मचा दी है। कांस्टेबल सुनील कुमार शुक्ला ने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट कर विभाग के उच्चाधिकारियों, विशेषकर IPS अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। मामला सामने आते ही आनन-फानन में कांस्टेबल को 20 दिन की छुट्टी पर भेज दिया गया है और विभाग ने जांच शुरू कर दी है।
“काले अंग्रेज चला रहे विभाग”: गंभीर आरोपों की बौछार
वायरल वीडियो में सुनील कुमार शुक्ला ने विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं:
वसूली का मॉडल: कांस्टेबल का आरोप है कि रिजर्व पुलिस लाइन में ड्यूटी लगाने के नाम पर हर महीने सिपाहियों और दीवानों से गार्ड कमांडर के जरिए करीब 2,000 रुपये वसूले जाते हैं।
लाखों का खेल: सुनील ने दावा किया कि अकेले डेटा सेक्शन की 400 ड्यूटियों से हर महीने लगभग 8 लाख रुपये की उगाही होती है। यह रकम गणना प्रभारी और आरआई (RI) के माध्यम से ऊपर तक पहुंचाई जाती है।
तल्ख टिप्पणी: कांस्टेबल ने पुलिस विभाग के आला अफसरों की तुलना ‘काले अंग्रेजों’ से करते हुए कहा कि वे व्यवस्था को भ्रष्ट बना रहे हैं।
लखनऊ पुलिस लाइन में हड़कंप: सिपाही ने खोला मोर्चा, ‘काले अंग्रेजों’ पर लगाया हर महीने ₹8 लाख की वसूली का आरोप
सबकी नजरें पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं- आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या आवाज उठाने वाले सिपाही पर ही गाज गिरेगी?@lucknowpolice @Uppolice @DGP_UP @AdminLKO pic.twitter.com/uMFwUCUo0l
— The Lucknow 360 (@thelucknow360) May 7, 2026
मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार
कांस्टेबल ने सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। वीडियो में उन्होंने कहा, “विभाग के भीतर से न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं है, इसलिए मुख्यमंत्री स्वयं इस पूरे तंत्र की निष्पक्ष जांच कराएं।”
पुलिस विभाग की प्रतिक्रिया
वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद अधिकारी बचाव की मुद्रा में हैं। सहायक पुलिस आयुक्त डॉ. शिप्रा पांडेय ने बताया:
“पुलिस लाइन्स लखनऊ में नियुक्त कांस्टेबल द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में एक कमेटी का गठन कर प्रकरण की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आवश्यक विधिक कार्यवाही की जाएगी।”
फिलहाल, इस वीडियो ने लखनऊ पुलिस की छवि और आंतरिक अनुशासन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि क्या एक सिपाही के इन आरोपों में सच्चाई है या यह अनुशासनहीनता का मामला है।




